बच्चा हर दंपत्ति के जीवन का सबसे खूबसूरत एहसास होता है। लेकिन हर किसी के लिए यह सफर आसान नहीं होता। कई बार मेडिकल समस्याएं, उम्र, हार्मोनल असंतुलन या अन्य कारणों के चलते महिला या पुरुष प्राकृतिक तरीके से माता-पिता नहीं बन पाते। ऐसे में IVF यानी इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन उनकी उम्मीदों को फिर से जगाता है।
लेकिन IVF की सबसे बड़ी चुनौती इसका खर्च है, क्योंकि भारत में एक IVF चक्र की कीमत 1 लाख से 2.5 लाख रुपये या उससे ज्यादा हो सकती है। यह खर्च हर परिवार के लिए संभव नहीं होता। इसलिए बहुत से लोग यह जानना चाहते हैं कि फ्री में IVF कहां होता है? क्या भारत में IVF मुफ्त मिल सकता है? क्या सरकार किसी योजना के तहत IVF फ्री कर रही है?
अगर आप भी यही जानना चाहते हैं, तो यह लेख आपके लिए है।
IVF क्या होता है?
IVF जिसका पूरा नाम इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन है, एक आधुनिक प्रजनन तकनीक है जिसमें महिला के अंडाणु (eggs) और पुरुष के शुक्राणु (sperm) को प्रयोगशाला में मिलाया जाता है। जब इन दोनों के मिलन से भ्रूण (Embryo) बन जाता है, तो उसे महिला की गर्भाशय में वापस ट्रांसफर किया जाता है, ताकि वह विकसित होकर सामान्य गर्भावस्था शुरू कर सके।
IVF तब उपयोग में आता है जब प्राकृतिक तरीके से गर्भधारण संभव नहीं होता, या बार-बार कोशिश करने के बाद भी गर्भ नहीं ठहरता। IVF से जुड़ी तकनीक पिछले कुछ वर्षों में काफी विकसित हुई है और आज लाखों माता-पिता IVF के जरिए बच्चे पा रहे हैं। भारत में भी IVF काफी लोकप्रिय हो रहा है और कई सरकारी व निजी अस्पताल इसे उपलब्ध करा रहे हैं।

IVF की जरूरत किन लोगों को होती है?
1. महिला को Fallopian Tube Block होती है
जब महिला की फ़ैलोपियन ट्यूब ब्लॉक हो जाती है, तो अंडाणु और शुक्राणु प्राकृतिक रूप से नहीं मिल पाते, जिससे गर्भधारण असंभव हो जाता है। ऐसी स्थिति में IVF सबसे अच्छा विकल्प होता है क्योंकि इसमें अंडाणु और शुक्राणु को शरीर के बाहर लैब में मिलाया जाता है और फिर भ्रूण को सीधे गर्भाशय में रखा जाता है। इससे ट्यूब की समस्या IVF में बाधा नहीं बनती।
2. पति के शुक्राणु कमजोर या कम संख्या में होते हैं
कई पुरुषों को low sperm count, कम motility या sperm quality खराब होने की समस्या होती है, जिससे प्राकृतिक गर्भधारण मुश्किल होता है। IVF में ICSI तकनीक का उपयोग किया जा सकता है, जिसमें एक स्वस्थ शुक्राणु को माइक्रोस्कोप की मदद से सीधे अंडाणु में इंजेक्ट किया जाता है। इससे sperm quality की समस्या IVF में बाधा नहीं बनती और गर्भधारण की संभावना बढ़ जाती है।
3. एंडोमेट्रियोसिस की समस्या होती है
एंडोमेट्रियोसिस एक ऐसी स्थिति है जिसमें गर्भाशय की परत (Endometrium) uterus के बाहर बढ़ जाती है। इससे दर्द, चक्र में अनियमितता और बांझपन की समस्या हो सकती है। एंडोमेट्रियोसिस में प्राकृतिक गर्भधारण मुश्किल हो जाता है। IVF इस स्थिति में बेहतर विकल्प होता है क्योंकि भ्रूण सीधे गर्भाशय में implant किया जाता है, जिससे सफल गर्भधारण की संभावना बढ़ती है।
4. बार-बार गर्भपात हो चुका हो
कुछ महिलाओं में बार-बार गर्भ ठहरने के बाद miscarriage हो जाता है। इसके कई कारण हो सकते हैं जैसे genetic issue, hormonal imbalance या uterus की समस्या। IVF में एम्ब्रियो को पहले टेस्ट किया जाता है (PGT तकनीक) ताकि healthiest embryo चुना जा सके। इससे miscarriage का जोखिम कम होता है और सफल pregnancy की संभावना बढ़ती है।
5. महिला की उम्र 35 साल से अधिक हो
35 वर्ष के बाद महिला के अंडाणुओं की संख्या और गुणवत्ता दोनों कम हो जाते हैं, जिससे प्राकृतिक गर्भधारण कठिन हो सकता है। IVF में दवाओं की मदद से अधिक healthy eggs निकाले जाते हैं और उनमें से best embryo चुनकर uterus में implant किया जाता है। इससे उम्र बढ़ने के बाद भी गर्भवती होने की संभावना बनी रहती है।
6. हार्मोनल समस्याओं के कारण Ovulation नहीं हो रहा हो
कई बार hormonal imbalance, PCOS या thyroid जैसी समस्याओं की वजह से ovulation ठीक से नहीं हो पाता और महिला egg release नहीं करती। IVF में egg development को दवाओं की मदद से नियंत्रित किया जाता है और egg freezing या retrieval की प्रक्रिया से pregnancy की संभावना बढ़ाई जाती है।
7. Unexplained Infertility हो
कभी-कभी सभी जांच रिपोर्ट normal आने के बावजूद भी गर्भधारण नहीं हो पाता, इसे unexplained infertility कहा जाता है। ऐसी स्थिति में IVF एक वैज्ञानिक और प्रभावी तरीका है क्योंकि इसमें fertilization और embryo development को doctors और लैब तकनीक की निगरानी में करवाया जाता है। इससे success rate प्राकृतिक प्रयासों की तुलना में कहीं अधिक होती है।
IVF फ्री में क्या होता है?
भारत में कई सरकारी अस्पताल, राज्य सरकार की योजनाएँ और कुछ सामाजिक संस्थाएँ (NGO) उन दंपत्तियों को फ्री IVF (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) की सुविधा देती हैं, जो आर्थिक रूप से सक्षम नहीं होते या महंगे प्राइवेट IVF इलाज का खर्च नहीं उठा पाते। यह सुविधा उन कपल्स के लिए बहुत बड़ी उम्मीद होती है जो सालों से बच्चा न होने की समस्या से जूझ रहे होते हैं।
फ्री IVF में भी लगभग वही प्रक्रिया शामिल होती है जो प्राइवेट क्लिनिक में की जाती है, जैसे, महिला के अंडों का संग्रह (Egg Retrieval), पुरुष के शुक्राणुओं का संग्रह (Sperm Collection), लैब में फर्टिलाइजेशन, एम्ब्रियो बनाना और फिर गर्भाशय में एम्ब्रियो ट्रांसफर। फर्क सिर्फ लागत का होता है। सरकारी सहायताओं, योजनाओं और CSR फंड की मदद से यह उपचार या तो फ्री होता है या फिर बहुत कम खर्च में उपलब्ध होता है।
फ्री IVF में अक्सर डॉक्टर की सलाह, बेसिक टेस्ट, अल्ट्रासाउंड, लेबोरेटरी प्रक्रिया और एम्ब्रियो ट्रांसफर जैसी मुख्य चीज़ें शामिल होती हैं। कुछ मामलों में दवाइयाँ, हार्मोन इंजेक्शन या उन्नत तकनीक जैसे ICSI, PGD या डोनर एग/स्पर्म का खर्च मरीजों को खुद वहन करना पड़ता है क्योंकि यह अतिरिक्त और महंगी प्रक्रियाएँ होती हैं।
फ्री IVF पाने के लिए मरीजों को पात्रता मानदंड पूरा करना होता है, जैसे, आय प्रमाण पत्र, उम्र सीमा, मेडिकल रिपोर्ट और सरकारी पहचान पत्र। कई बार फ्री IVF केंद्रों में वेटिंग लिस्ट भी होती है, इसलिए प्रक्रिया में समय लग सकता है।
समग्र रूप से देखा जाए तो फ्री IVF उन परिवारों के लिए एक वरदान है, जो माता-पिता बनने का सपना देखते हैं लेकिन आर्थिक स्थिति इनके रास्ते में बाधा बनती है।
| सुविधाएँ | फ्री/कम लागत में शामिल होती हैं |
| डॉक्टर की कंसल्टेशन | शामिल |
| बेसिक फर्टिलिटी टेस्ट | शामिल |
| IVF स्टिमुलेशन और इंजेक्शन | कभी-कभी मुफ्त, कभी कम दाम में |
| एग कलेक्शन | शामिल |
| स्पर्म कलेक्शन | शामिल |
| फर्टिलाइजेशन (ICSI या IVF) | शामिल या कम लागत |
| एम्ब्रियो ट्रांसफर | शामिल |
| अल्ट्रासाउंड और मॉनिटरिंग | शामिल |
फ्री IVF में क्या नहीं मिलता या कम उपलब्ध होता है?
हालांकि फ्री या कम लागत वाला IVF आर्थिक रूप से कमजोर दंपत्तियों के लिए बहुत मददगार होता है, लेकिन इसमें कुछ सीमाएँ भी होती हैं। सरकारी योजनाओं या NGO द्वारा दी जाने वाली सुविधा में सभी प्रकार की उन्नत सेवाएँ या तकनीक शामिल नहीं होतीं। इसलिए मरीज को कुछ चीज़ों का खर्च खुद उठाना पड़ सकता है या कभी-कभी सेवा उपलब्ध ही नहीं होती।
सबसे पहले, फ्री IVF में उन्नत तकनीकों की उपलब्धता कम होती है। जैसे—ICSI, PICSI, PGD/PGS (जेनेटिक टेस्टिंग), लेज़र असिस्टेड हैचिंग (LAH), ERA टेस्ट, या फर्टिलिटी प्रिज़र्वेशन जैसी तकनीकें अक्सर या तो शामिल नहीं होतीं या इनके लिए अतिरिक्त शुल्क लिया जाता है। इसके अलावा, अगर किसी दंपत्ति को डोनर एग, डोनर स्पर्म या डोनर एम्ब्रियो की जरूरत होती है, तो इसका खर्च ज़्यादातर मरीजों को स्वयं उठाना पड़ता है क्योंकि यह महंगी कैटेगरी में आता है।
कुछ मामलों में, हार्मोन दवाइयाँ, इंजेक्शन, सप्लीमेंट्स और IVF स्टिमुलेशन से जुड़ी ज़रूरी मेडिसिन पूरी तरह मुफ्त नहीं मिलतीं। फ्री IVF में अक्सर सिर्फ बेसिक दवाइयाँ मिलती हैं, जबकि हाई डोज या स्पेशल हार्मोन इंजेक्शन के लिए मरीजों को भुगतान करना पड़ सकता है।
इसके अलावा, फ्री IVF में वेटिंग टाइम ज्यादा होता है, और कई बार सिर्फ एक या सीमित चक्र ही उपलब्ध होते हैं। निजी IVF क्लिनिक की तुलना में डॉक्टर की उपलब्धता, मशीनों की संख्या और लैब क्षमता भी सीमित होती है, इसलिए प्रक्रिया तेजी से नहीं हो पाती।
समग्र रूप से देखा जाए, फ्री IVF बहुत सहायक होता है लेकिन मरीज को यह समझना चाहिए कि यह हर सुविधा वाला प्रीमियम IVF नहीं होता, बल्कि बुनियादी IVF प्रक्रिया का समर्थन है।
कहाँ-कहाँ फ्री या कम कीमत वाला IVF मिलता है?
भारत में कई जगहों पर आर्थिक रूप से कमजोर दंपत्तियों के लिए IVF उपचार मुफ्त या बहुत कम दाम में प्रदान किया जाता है। यह सुविधा हर जगह उपलब्ध नहीं होती, लेकिन कुछ विशेष संस्थान, सरकारी योजनाएँ और हेल्थ मिशन इस सेवा को समर्थ बनाते हैं। अक्सर मरीजों को डॉक्यूमेंट और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर पात्रता साबित करनी होती है।
फ्री या कम लागत वाला IVF ज़्यादातर निम्न स्थानों पर मिलता है:
1. सरकारी अस्पताल और मेडिकल कॉलेज
कुछ प्रसिद्ध सरकारी अस्पताल जैसे:
- AIIMS (दिल्ली और अन्य राज्य शाखाएँ)
- PGIMER (चंडीगढ़)
- किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (लखनऊ)
- सरकारी मेडिकल कॉलेज और IVF रिसर्च सेंटर
इन जगहों पर IVF कम कीमत या कभी-कभी मुफ्त उपलब्ध होता है। हालांकि यहाँ वेटिंग लिस्ट लंबी हो सकती है क्योंकि माँग ज़्यादा और संसाधन सीमित होते हैं।
2. राज्य सरकार की प्रजनन (Infertility) योजनाएँ
कई राज्य सरकारें अपनी मेडिकल हेल्थ स्कीमों के माध्यम से महिलाओं को मातृत्व सहायता देती हैं। कुछ राज्यों में विशेष कार्यक्रम चलाए जाते हैं जहां बांझपन से जूझ रहे दंपत्तियों के लिए IVF सस्ती दरों पर उपलब्ध कराया जाता है।
3. आयुष्मान भारत योजना (PM-JAY)
भारत सरकार की आयुष्मान भारत योजना के तहत कुछ अस्पताल IVF का खर्च आंशिक या पूरी तरह उठाते हैं। हर अस्पताल में यह सेवा उपलब्ध नहीं होती, इसलिए योजना से जुड़े IVF सेंटर्स की सूची जांचना आवश्यक होता है।
4. प्राइवेट IVF क्लिनिक द्वारा CSR (Corporate Social Responsibility) कार्यक्रम
कुछ निजी IVF अस्पताल और क्लिनिक समय-समय पर CSR या हेल्पिंग कैंप्स के तहत:
- छूट
- सब्सिडी
- या सीमित संख्या में फ्री IVF
प्रदान करते हैं। यह अवसर अधिकतर आर्थिक रूप से कमजोर और योग्य मरीजों को मिलता है।
कौन लोग फ्री IVF के लिए पात्र होते हैं?
फ्री या कम लागत वाले IVF उपचार के लिए हर व्यक्ति पात्र नहीं होता। इस सुविधा का उद्देश्य उन लोगों की मदद करना है जिनके लिए प्राइवेट IVF का खर्च उठाना कठिन होता है या जो लंबे समय से बांझपन की समस्या से पीड़ित हैं। इसलिए, कुछ पात्रता मानदंड बनाए गए हैं। नीचे बताया गया है कि आमतौर पर किन लोगों को फ्री IVF का लाभ मिल सकता है:
1. आर्थिक रूप से कमजोर दंपत्ति
यह सुविधा मुख्य रूप से उन कपल्स को मिलती है जिनकी आर्थिक स्थिति कमजोर होती है।
इसके लिए आमतौर पर इन दस्तावेज़ों की जरूरत होती है:
- आय प्रमाण पत्र (Income Certificate)
- राशन कार्ड (BPL या आर्थिक श्रेणी प्रमाण)
- सरकारी पहचान पत्र (Aadhar Card, PAN आदि)
इन दस्तावेजों के आधार पर यह तय किया जाता है कि व्यक्ति आर्थिक रूप से सहायता योग्य है या नहीं।
2. 1–2 साल से संतान प्राप्ति में असफल कपल
अगर कोई दंपत्ति कम से कम 1 से 2 साल तक प्राकृतिक रूप से प्रेगनेंसी की कोशिश कर रहा है लेकिन सफल नहीं हो पाया है, तो उसे IVF की आवश्यकता मानी जाती है और ऐसे मामलों में फ्री IVF के लिए पात्रता मिल सकती है।
3. डॉक्टर की मेडिकल रिपोर्ट आवश्यक
डॉक्टर द्वारा दी गई मेडिकल रिपोर्ट जिसमें यह बताया गया हो कि:
- महिला या पुरुष में बांझपन की समस्या है
- प्राकृतिक तरीके से गर्भधारण की संभावना कम है
- IVF या ICSI जैसे उपचार की आवश्यकता है
ऐसी प्रमाणित रिपोर्ट के बिना आवेदन स्वीकार नहीं किया जाता।
4. उम्र की सीमा
कुछ योजनाओं में उम्र की सीमा भी होती है, जैसे:
- महिला की उम्र: आमतौर पर 20–40 वर्ष
- पुरुष की उम्र: 21–50 वर्ष तक
यह सीमा हर अस्पताल और योजना में अलग हो सकती है।
5. भारतीय नागरिक होना ज़रूरी
फ्री IVF सुविधाएँ केवल भारतीय नागरिकों के लिए उपलब्ध होती हैं। इसके लिए आधार कार्ड, वोटर कार्ड या सरकारी पहचान आवश्यक होती है।

भारत में सरोगेसी से जुड़ी IVF की लागत
भारत में IVF की सामान्य लागत प्रति चक्र लगभग ₹1,10,000 से ₹2,20,000 के बीच होती है। लेकिन ध्यान रखें, यह सिर्फ बेसिक पैकेज की शुरुआती कीमत है। आपकी आवश्यकताओं के आधार पर अतिरिक्त प्रक्रियाएँ, दवाइयाँ और टेस्ट जुड़ने से कुल खर्च बढ़ सकता है।
IVF की लागत कई बातों पर निर्भर करती है, जैसे महिला की उम्र, IVF के कितने चक्र लगेंगे, उन्नत तकनीक का इस्तेमाल, और डॉक्टर या IVF विशेषज्ञ का अनुभव और सफलता दर।
| IVF उपचार के प्रकार | IVF की लागत (INR) |
| सेल्फ एग और स्पर्म के साथ IVF | ₹1,50,000 |
| ICSI के साथ IVF | ₹1,65,000 – ₹1,85,000 |
| डोनर एग के साथ IVF | ₹2,06,000 – ₹3,00,000 |
| डोनर स्पर्म के साथ IVF | ₹2,10,000 |
| लेज़र असिस्टेड हैचिंग (LAH) के साथ IVF | ₹2,10,000 – ₹2,20,000 |
| डोनर एम्ब्रियो के साथ IVF | ₹2,05,000 – ₹3,00,000 |
| PGD तकनीक के साथ IVF | ₹3,00,000 |
भारत के विभिन्न राज्यों में IVF की लागत
| राज्य | IVF की लागत (INR) |
| भारत (औसत) | ₹1,50,000 – ₹1,80,000 |
| रायपुर | ₹1,40,000 – ₹2,00,000 |
| दिल्ली | ₹1,40,000 – ₹2,30,000 |
| मुंबई | ₹1,50,000 – ₹2,40,000 |
| पंजाब | ₹1,00,008 – ₹2,00,000 |
| हरियाणा | ₹1,40,000 – ₹2,00,000 |
| राजस्थान | ₹1,50,000 – ₹2,00,000 |
| उत्तर प्रदेश | ₹1,40,000 – ₹2,10,000 |
| मध्य प्रदेश | ₹1,40,000 – ₹2,20,000 |
| देहरादून | ₹1,40,000 – ₹2,00,000 |
| बिहार | ₹1,30,000 – ₹2,00,000 |
| झारखंड | ₹1,40,000 – ₹2,00,000 |
| असम | ₹1,20,000 – ₹1,80,000 |
| गुजरात | ₹1,40,000 – ₹2,80,000 |
| तमिलनाडु | ₹1,40,000 – ₹2,30,000 |
| आंध्र प्रदेश | ₹1,40,000 – ₹2,00,000 |
| हिमाचल प्रदेश | ₹1,40,000 – ₹2,20,000 |
किन दस्तावेजों की जरूरत होती है?
फ्री या कम लागत वाले IVF उपचार के लिए कुछ जरूरी दस्तावेज जमा करने होते हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि मरीज पात्र वर्ग में आता है। ये दस्तावेज व्यक्ति की पहचान, आर्थिक स्थिति और मेडिकल आवश्यकता को साबित करते हैं।
फ्री IVF के लिए आमतौर पर निम्न दस्तावेजों की आवश्यकता होती है:
| दस्तावेज का नाम | उद्देश्य |
| आधार कार्ड / पहचान पत्र | पहचान की पुष्टि |
| आय प्रमाण पत्र (Income Certificate) | आर्थिक रूप से पात्रता साबित करने के लिए |
| बी.पी.एल कार्ड या राशन कार्ड (यदि लागू हो) | आर्थिक श्रेणी साबित करने के लिए |
| निवास प्रमाण पत्र (Address Proof) | राज्य या जिले में निवास की पुष्टि |
| शादी का प्रमाण पत्र (Marriage Certificate) | दंपत्ति के वैवाहिक स्थिति की पुष्टि |
| डॉक्टर की रिपोर्ट (Infertility Report) | बांझपन या IVF की आवश्यकता का मेडिकल प्रमाण |
| मेडिकल टेस्ट रिपोर्ट | हार्मोन टेस्ट, सोनोग्राफी, ब्लड टेस्ट आदि |
| आयुष्मान कार्ड (यदि योजना लागू हो) | योजना के तहत लाभ लेने के लिए |
IVF के लिए Select IVF क्यों चुनें?
Select IVF पर अब तक कई बांझपन से जूझ रहे दंपत्तियों ने भरोसा किया है और अपना भविष्य उज्जवल बनाया है। हम हर उस मरीज की परवाह करते हैं जो संतान प्राप्ति में कठिनाइयों का सामना कर रहा है। हम समझते हैं कि बांझपन का दौर कितना भावनात्मक और चुनौतीपूर्ण होता है, इसलिए हम आपके माता-पिता बनने के सपने को पूरा करने में आपकी सहायता करना चाहते हैं।
हमारे केंद्र में IVF उपचार की कीमतें किफायती हैं, हम सर्वोच्च सफलता दर सुनिश्चित करते हैं, पूरी पारदर्शिता रखते हैं और प्रत्येक मरीज को व्यक्तिगत देखभाल तथा समर्थन प्रदान करते हैं। हमारे क्लिनिक में इलाज कराएं और अपने जीवन में खुशी और अपने नवजात बच्चे की मीठी किलकारियों का आनंद लें।
क्यों Select IVF, IVF उपचार के लिए सबसे बेहतर है?
- IVF और अन्य बांझपन उपचारों की उच्च सफलता दर
- विभिन्न बांझपन समस्याओं के लिए कई उपचार विकल्प उपलब्ध
- नवीनतम और उन्नत तकनीकों का उपयोग
- अत्यधिक योग्य और अनुभवी डॉक्टर
- IVF और अन्य उपचारों के लिए किफायती लागत
- प्रक्रिया के दौरान आराम, सहयोग और भावनात्मक समर्थन सुनिश्चित
निष्कर्ष
फ्री में IVF कहां होता है? इस सवाल का जवाब आसान नहीं है, लेकिन उम्मीद खत्म नहीं होती। भारत में कई सरकारी अस्पताल, NGO-based प्रोग्राम और कुछ राज्य स्वास्थ्य योजनाओं में पात्र दंपतियों को कम लागत या कभी-कभी पूरी तरह मुफ्त IVF सुविधा दी जाती है। हालांकि, फ्री IVF हर जगह उपलब्ध नहीं है, बल्कि केवल चुनिंदा केंद्रों में मिलता है। सही जानकारी, आवश्यक दस्तावेज और पात्रता मानकों को समझकर कई कपल्स इसका लाभ ले चुके हैं।
कई बार प्रक्रिया में समय लगता है क्योंकि सूची लंबी होती है, लेकिन धैर्य रखना जरूरी है। IVF भावनात्मक, शारीरिक और आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण होता है, इसलिए मुफ्त या सब्सिडी पर इलाज मिलना कई दंपतियों के लिए जीवन बदलने जैसा होता है। सरकारी योजनाएं और हेल्थ कार्ड जैसे आयुष्मान भारत कभी-कभी IVF के कुछ हिस्से कवर कर देते हैं, हालांकि यह हर हॉस्पिटल में लागू नहीं होता।
यदि कोई दंपति IVF अफोर्ड नहीं कर पाता, तो पहले अपने शहर के सरकारी अस्पताल, मेडिकल कॉलेज, आयुष्मान भारत सूची के हॉस्पिटल और फर्टिलिटी कैंप्स के बारे में जानकारी इकट्ठा करनी चाहिए। साथ ही डॉक्यूमेंट तैयार रखना जैसे: आय प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, मेडिकल रिपोर्ट, शादी का प्रमाण पत्र आदि।
अंत में, फ्री IVF मिलना कठिन है लेकिन नामुमकिन नहीं। सही जानकारी, समय पर आवेदन और उचित मार्गदर्शन आपकी पेरेंटहुड की यात्रा को एक कदम और करीब ला सकता है। हमेशा भरोसा रखें, उम्मीद वहीं होती है जहां रास्ता होता है।
FAQs (विस्तृत उत्तर)
1. क्या भारत में पूरी तरह फ्री IVF मिलता है?
हाँ, भारत में कुछ सरकारी अस्पताल, मेडिकल कॉलेज और NGO प्रोग्राम ऐसे हैं जहाँ IVF या तो पूरी तरह मुफ्त या बहुत कम लागत में उपलब्ध होता है। लेकिन यह सुविधा हर शहर में नहीं होती। कुछ राज्य सरकारें बांझपन उपचार को स्वास्थ्य योजना में शामिल करती हैं। साथ ही कैंसर, एंडोमेट्रियोसिस या ट्यूबल ब्लॉकेज जैसे मेडिकल कारण होने पर मरीज को प्रायोरिटी दी जाती है। इसमें प्रक्रिया का खर्च सरकार या फंडिंग संस्था द्वारा कवर किया जाता है, इसलिए मरीज को बहुत कम या शून्य भुगतान करना पड़ता है।
2. फ्री IVF के लिए कौन पात्र होता है?
पात्रता आय, मेडिकल स्थिति और उम्र पर आधारित होती है। आमतौर पर कम आय वर्ग (Below Poverty Line – BPL), आयुष्मान कार्ड धारक और सामाजिक-आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के दंपतियों को प्राथमिकता दी जाती है। इसके अलावा वे महिलाएँ जिनके ट्यूब्स ब्लॉक हैं, बार-बार गर्भपात हुआ है या पुरुष में sperm count बहुत कम है, वे भी योग्य मानी जाती हैं। उम्र सामान्यतः 21–40 वर्ष के बीच होनी चाहिए।
3. फ्री IVF प्रक्रिया में कितना समय लगता है?
फ्री IVF में waiting list आमतौर पर लंबी होती है, क्योंकि सरकारी संस्थाएं सीमित cycles उपलब्ध करवाती हैं। समय 6 महीने से लेकर 12–18 महीने तक हो सकता है। प्रक्रिया शुरू होने के बाद injections, oocyte retrieval, fertilization और embryo transfer में 4–6 सप्ताह लग सकते हैं। सफलता न मिलने पर दोबारा cycle पाने के लिए फिर से प्रतीक्षा करनी पड़ सकती है।
4. क्या आयुष्मान भारत IVF कवर करता है?
हर राज्य में नियम अलग-अलग हैं। कुछ राज्यों में आयुष्मान भारत या राज्य स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के अंतर्गत IVF के diagnostic tests, hormones, IUI या IVF cycle के कुछ हिस्से शामिल होते हैं, जबकि कई राज्यों में यह सुविधा अभी लागू नहीं हुई है। इसलिए मरीजों को अपने पंजीकृत अस्पताल से पहले eligibility और coverage की पुष्टि करनी चाहिए।
5. फ्री IVF के लिए क्या डॉक्यूमेंट जरूरी होते हैं?
आमतौर पर आधार कार्ड, आय प्रमाण पत्र (Income certificate), BPL कार्ड या आयुष्मान कार्ड, शादी का प्रमाण पत्र, मेडिकल infertility diagnosis रिपोर्ट और डॉक्टर का referral letter जरूरी होता है। कुछ स्थानों पर जननी सुरक्षा कार्ड या ration card भी मांगा जाता है। सभी दस्तावेज अपडेटेड और मान्य होने चाहिए ताकि आवेदन अस्वीकृत न हो।
6. क्या फ्री IVF की सफलता दर प्राइवेट IVF जितनी होती है?
सफलता सिर्फ अस्पताल पर निर्भर नहीं होती बल्कि उम्र, जीवनशैली, अंडों और शुक्राणु की गुणवत्ता, गर्भाशय की स्थिति और underlying medical conditions पर निर्भर करती है। सरकारी IVF केंद्रों में अनुभवी विशेषज्ञ होते हैं लेकिन कभी-कभी उपकरण या दवाओं की उपलब्धता सीमित होती है। फिर भी कई सरकारी IVF कार्यक्रमों से हजारों दंपतियों को सकारात्मक परिणाम मिले हैं।
7. क्या फ्री IVF कराने के बाद दोबारा उसी योजना में IVF हो सकता है?
यह प्रोग्राम और राज्य नीति पर निर्भर करता है। कुछ जगह केवल एक IVF cycle दी जाती है, जबकि कुछ सरकारी केंद्र एक या दो retry cycles की अनुमति दे सकते हैं यदि पहली बार गर्भ न ठहरे। eligibility और approvals इस आधार पर फिर से जांचे जाते हैं।
Read Also: